waqf amendment bill: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने गुरुवार (27 फरवरी) को नए वक्फ बिल को मंजूरी दे दी। 10 मार्च से शुरू हो रहे संसद सत्र में इसे पेश किए जाने की संभावना है। वक्फ (संशोधन) विधेयक केंद्रीय और राज्य वक्फ बोर्डों को नियंत्रित करने वाले कानूनों में 44 बदलाव प्रस्ताव किए गए हैं, जो तय करेंगे कि मुस्लिम धर्मार्थ संपत्तियों का प्रबंधन किस तरीके से किया जाए। 

सूत्रों की मानें तो मोदी कैबिनेट ने पिछले हफ्ते हुई बैठक में संयुक्त संसदीय समिति द्वारा प्रस्तावित 23 बदलावों में से 14 को स्वीकार कर लिया था। जेपीसी (ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी) को अगस्त में यह विधेयक सौंपा गया था। 13 फरवरी को उसने लंबी चर्चा के बाद अपनी रिपोर्ट पेश की। इस दौरान भी खूब विवाद हुआ। 

मल्लिकार्जुन खरगे संसद में उठाया था मुद्दा 
जेपीसी में शामिल विपक्षी सांसदों ने पक्षपात के आरोप लगाए थे। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस मुद्दे को संसद में उठाया था। उनका कहना है कि जेपीसी की रिपोर्ट में उनके असहमति नोट के कुछ हिस्से गायब कर दिए गए हैं। हालांकि, केंद्र ने इन आरोप से इनकार किया है। 

अगस्त 2024 में आया था वक्फ बिल
वक्फ संशोधन बिल अगस्त 2024 में पहली बार संसद में पेश किया गया था. लेकिन विपक्ष के विरोध के चलते इसे संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा गया। जगदंबिका पाल की अगुवाई वाली इस समिति ने कुछ संशोधनों के साथ सरकार को रिपोर्ट सौंपी। समिति की यह रिपोर्ट 13 फरवरी को संसद में पेश की गई। जिस आधार पर वक्फ बिल का नया ड्राफ्ट बना। मोदी कैबिनेट से मंजूरी के बाद यह बिल संसद में पेश किया जाएगा। 

'वक्फ बाय यूजर' प्रावधान हटाने का विरोध 
संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में वक्फ बिल के उन बदलावों को शामिल किया है, जो बीजेपी सांसदों ने दिए थे. विपक्षी सांसदों ने इसे वक्फ बोर्ड खत्म करने की कोशिश बताते हुए असहमति नोट और आपत्तियां दर्ज कराई। उन्होंने 'वक्फ बाय यूजर' प्रावधान हटाने के प्रस्ताव का भी विरोध किया है। हालांकि, जेपीसी 15 सदस्यों की सहमति से इस रिपोर्ट को मंजूरी दे दी। 14 सदस्यों ने असहमति जताई है।