Delhi Politics: अमानतुल्लाह खान को छोड़कर विपक्षी नेता आतिशी और आम आदमी पार्टी के सभी 21 विधायकों को 25 फरवरी को सदन से निष्कासित कर दिया गया था। इसके  बाद से विपक्षी नेता विधानसभा परिसर के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। इस मामले को लेकर अब आतिशी ने दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता को पत्र लिखा है। उन्होंने इस पत्र में विपक्षी नेताओं को सदन से बाहर निकालने का विरोध जताते हुए पीड़ा व्यक्त की। 

आतिशी ने विजेंद्र गुप्ता को लिखी चिट्ठी

आतिशी ने लिखा कि 'मैं पीड़ा और व्यथा के साथ लिख रही हूं कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत समानता और निष्पक्षता होती है। लेकिन बीते दिनों दिल्ली विधानसभा में जो हुआ, वो विपक्ष के नेताओं के साथ अन्याय है और लोकतांत्रिक मूल्यों पर कड़ा प्रहार है।' आतिशी ने आगे लिखा कि '25 फरवरी को उपराज्यपाल के अभिभाषण के दौरान सत्ता पक्ष ने मोदी-मोदी के नारे लगाए। वहीं विपक्षी नेताओं ने बाबा साहेब अंबेडकर के विचारों का सम्मान करते हुए जय भीम के नारे लगाए। सत्ता पक्ष के किसी भी विधायक पर कार्रवाई नहीं हुई लेकिन जय भीम के नारे लगाने वाले 21 विपक्षी विधायकों को सदन से तीन दिनों के लिए निष्कासित कर दिया गया।' 

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विधायकों के अधिकारों का हनन किया जा रहा है - आतिशी

आतिशी ने आगे कहा कि अध्यक्ष जी, आप भी सदन में विपक्ष के नेता रहे हैं। आपको सदन से निष्कासित किया जाता था लेकिन फिर भी विधानसभा परिसर में जाने और गांधी जी की मूर्ति के समक्ष विरोध प्रदर्शन करने के लिए नहीं रोका जाता था। परिसर में जाकर विरोध प्रदर्शन करने की संवैधानिक परंपरा रही है, जिसे कभी तोड़ा नहीं गया लेकिन आज विपक्षी विधायकों के अधिकारों का हनन किया जा रहा है। ऐसा पहली बार हुआ है कि चुने गए विधायकों को विधानसभा परिसर में घुसने तक नहीं दिया गया। ऐसा करके विपक्ष को दबाने और उनकी आवाज को कुचलने का काम किया गया है। 

'लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाने का हक'

संविधान में हमें अधिकार है कि हम लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठा सकते हैं लेकिन अगर विपक्ष की आवाज को ही दबा दिया जाएगा, तो लोकतंत्र कैसे बचेगा? आपका कर्तव्य है कि आप सभी विधायकों के साथ समान न्याय करें। आपसे आग्रह है कि आप लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने के लिए सुनिश्चित करें कि किसी भी विधायक को उसके संवैधानिक अधिकारों से वंधित न किया जाए। बाबा साहेब अंबेडकर द्वारा रखी गई संविधान की नींव की हमें रक्षा करनी होगी। 

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