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MP Expressway: इंदौर, मध्य प्रदेश का प्रमुख शहर, लगातार विकास की ओर बढ़ रहा है। यहां की बढ़ती आबादी और यातायात को ध्यान में रखते हुए इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) ने एमआर-12 नामक एक नई 6-लेन सड़क के निर्माण की योजना बनाई है। इस सड़क से उज्जैन और ओंकारेश्वर जाने वाले यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा, अब उन्हें इंदौर शहर के भीतर से होकर नहीं गुजरना पड़ेगा।

समय की होगी बचत
एमआर-12 सड़क बनने से महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग (उज्जैन) और ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग (खंडवा) के बीच की दूरी कम हो जाएगी। अभी, सुबह और शाम के व्यस्त समय में इंदौर शहर के ट्रैफिक को पार करने में 30 से 45 मिनट का समय लग जाता है, लेकिन इस सड़क के बनने के बाद यह समय काफी कम हो जाएगा।

इंदौर, उज्जैन और ओंकारेश्वर को जोड़ेगी नई सड़क
इस नई सड़क का सीधा लाभ इंदौर, उज्जैन और ओंकारेश्वर जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक और पर्यटन स्थलों को मिलेगा। श्रद्धालु और यात्री अब इंदौर से होकर गुजरे बिना उज्जैन से सीधे ओंकारेश्वर तक पहुंच सकेंगे।

200 करोड़ की लागत से बनेगी सड़क
इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) के अनुसार, इस सड़क का निर्माण 200 करोड़ रुपये की लागत से किया जाएगा। इसमें से सिर्फ रेलवे क्रॉसिंग और ब्रिज पर ही लगभग 100 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

यहां से होकर गुजरेगी एमआर-12 सड़क

  1. यह सड़क इंदौर बायपास के अरंडिया गांव से शुरू होगी।
  2. कालोद हाला, भांग्या और कुमेढ़ी गांवों से होकर गुजरेगी।
  3. इंदौर-उज्जैन रोड से जुड़कर यात्रियों को नया रूट प्रदान करेगी।

सिंहस्थ 2028 से पहले पूरा होगा निर्माण कार्य
इंदौर संभागायुक्त दीपक सिंह ने बताया कि, सिंहस्थ 2028 से पहले इस 6-लेन सड़क का निर्माण पूरा कर लिया जाएगा। इसके बनने के बाद उज्जैन से खंडवा या सेंधवा जाने वाले यात्रियों को इंदौर शहर के अंदर नहीं आना पड़ेगा। वे सीधे इंदौर बायपास से जुड़ जाएंगे, जिससे समय की बचत होगी और ट्रैफिक कम होगा।

रियल एस्टेट सेक्टर को मिलेगा बढ़ावा
इस सड़क के बनने से सांवेर रोड और बायपास क्षेत्र के आसपास तेजी से बसावट होगी। रियल एस्टेट सेक्टर में भी तेजी आएगी, जिससे लोगों को यहां निवेश और बसने के नए अवसर मिलेंगे।

नए बायपास से भारी वाहनों का दबाव होगा कम
फिलहाल, भारी वाहन एमआर-11 सड़क से सुखलिया होते हुए लवकुश चौराहा पहुंचते हैं, जिससे शहर के भीतर ट्रैफिक का दबाव बढ़ जाता है। एमआर-12 के बनने के बाद यह समस्या काफी हद तक हल हो जाएगी, क्योंकि भारी वाहनों को शहर के भीतर से जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।