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Supreme Court: आपराधिक छवि के सांसदों और विधायकों के चुनाव लड़ने पर बैन लगाने की मांग वाली याचिका पर मंगलवार (4 मार्च) को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की बेंच मामले की सुनवाई करेंगे। 10 फरवरी को पिछले सुनवाई में कोर्ट ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग (EC) से इस पर 3 हफ्ते में जवाब मांगा था। कोर्ट ने कहा था कि केंद्र सरकार और EC तय समय में जवाब नहीं भी देते तो वे मामले को आगे बढ़ाएंगे। दोषी नेताओं के चुनाव लड़ने पर सिर्फ छह साल का बैन लगाने का कोई औचित्य नहीं है।  

2016 में दायर की गई थी याचिका 
वकील अश्विनी उपाध्याय ने 2016 में जनहित याचिका दायर कर जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 8 और 9 की वैधता को चुनौती दी थी। याचिका में सांसदों-विधायकों के खिलाफ क्रिमिनल केसों को जल्द खत्म करने और दोषी राजनेताओं पर आजीवन प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है।

केंद्र सरकार ने किया विरोध 
केंद्र सरकार ने दागी नेताओं पर चुनाव लड़ने से आजीवन प्रतिबंध का विरोध किया था। सरकार ने कहा था कि 6 साल की पाबंदी काफी है। इस तरह की अयोग्यता पर फैसला लेना संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है।

छह साल का बैन लगाने का कोई औचित्य नहीं 
पिछले सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि केंद्र सरकार और EC तय समय में जवाब नहीं भी देते तो वे मामले को आगे बढ़ाएंगे। दोषी नेताओं के चुनाव लड़ने पर सिर्फ छह साल का बैन लगाने का कोई औचित्य नहीं है।  

कानून तोड़ने वाले कानून बनाने का काम कैसे कर सकते हैं? 
कोर्ट ने यह भी कहा था कि अगर किसी सरकारी कर्मचारी को दोषी ठहराया जाता है तो वह जीवन भर के लिए सेवा से बाहर हो जाता है। फिर दोषी व्यक्ति संसद में कैसे लौट सकता है? कानून तोड़ने वाले कानून बनाने का काम कैसे कर सकते हैं?