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दिल्ली में प्रतिदिन लाखों लोग डीटीसी और क्लस्टर बसों का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन बस खराब होने की समस्या के कारण लोग अक्सर रास्ते में फंस जाते हैं। इस समस्या से निपटने के लिए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस और डीटीसी (दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन) ने मिलकर वॉट्सऐप ग्रुप बनाया है।

Delhi Traffic on DTC Bus Breakdown: दिल्ली की व्यस्त सड़कों पर जाम की एक बड़ी वजह ब्रेकडाउन होने वाली बसें हैं। हर दिन करीब-करीब 500 बसें खराब होने के कारण सड़क पर खड़ी हो जाती हैं, जिससे यातायात प्रभावित होता है। इस समस्या से निपटने के लिए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस और डीटीसी (दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन) ने मिलकर वॉट्सऐप ग्रुप बनाया है, जिससे खराब बसों को जल्द से जल्द हटाकर ट्रैफिक व्यवस्था को सामान्य किया जा सके।  

ब्रेकडाउन बसें बनीं थीं बड़ी परेशानी

दिल्ली में प्रतिदिन लाखों लोग डीटीसी और क्लस्टर बसों का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन बस खराब होने की समस्या के कारण लोग अक्सर रास्ते में फंस जाते हैं। खराब बस सड़क पर खड़ी रहती है और जब तक उसे ठीक नहीं किया जाता, तब तक ट्रैफिक बाधित रहता है। इस समस्या को देखते हुए स्पेशल कमिश्नर (ट्रैफिक) अजय चौधरी ने मीडिया को बताया कि दिल्ली में करीब 10,000 बसें रोजाना चलती हैं, जिनमें से 400-450 बसें किसी न किसी तकनीकी खराबी की वजह से बीच रास्ते में रुक जाती हैं। चूंकि ये भारी वाहन होते हैं, इन्हें धक्का देकर हटाना संभव नहीं होता, इसलिए इन्हें तुरंत ठीक करना जरूरी होता है।  

ब्रेकडाउन बसों के लिए नया सिस्टम लागू

पहले नियम यह था कि जिस बस डिपो की बस खराब होती थी, उसी डिपो से मैकेनिक बुलाया जाता था। इससे मैकेनिक को घटनास्थल तक पहुंचने में काफी समय लग जाता था, जिससे जाम की स्थिति और गंभीर हो जाती थी। अब नए सिस्टम के तहत, बस खराब होने पर नजदीकी डिपो के मैकेनिक को सूचना दी जाती है, ताकि जल्दी से बस की मरम्मत की जा सके। इससे समय की बचत होती है और यातायात बाधित नहीं होता।  

वॉट्सऐप ग्रुप से ट्रैफिक जाम की समस्या हल

इस समस्या को दूर करने के लिए ट्रैफिक पुलिस और डीटीसी के स्टाफ ने मिलकर एक वॉट्सऐप ग्रुप बनाया है। जब कोई बस खराब होती है, तो उसका ड्राइवर, कंडक्टर या इलाके का ट्रैफिक इंस्पेक्टर तुरंत बस की फोटो, नंबर और लोकेशन वॉट्सऐप ग्रुप में शेयर कर देता है। इस सूचना को देखकर नजदीकी डिपो के मैकेनिक को तुरंत अलर्ट भेजा जाता है, जिससे वह तेजी से घटनास्थल पर पहुंच सके। मैकेनिक मौके पर पहुंचकर बस की मरम्मत करता है, ताकि बस को जल्द से जल्द सड़क से हटाया जा सके और ट्रैफिक जाम की नौबत न आए। 

ड्राइवर और कंडक्टर को भी दी जा रही ट्रेनिंग

कई बार मैकेनिक के घटनास्थल तक पहुंचने में देर हो सकती है। इससे निपटने के लिए बस ड्राइवर, कंडक्टर और ट्रैफिक पुलिस को भी जरूरी तकनीकी प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे खुद ही प्राथमिक मरम्मत कर सकें। इससे बसों को जल्द से जल्द दुरुस्त कर यातायात सुचारु बनाए रखा जा सके।  

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नई व्यवस्था से दिल्ली की सड़कों पर सुधार

अब पहले की तरह घंटों तक सड़क पर खड़ी खराब बसों के कारण लंबा जाम नहीं लगता, क्योंकि मिनटों में समस्या हल की जा रही है। वॉट्सऐप ग्रुप के जरिए सूचना तुरंत साझा होने से नजदीकी डिपो का मैकेनिक जल्दी पहुंचकर बस को ठीक कर देता है, जिससे यातायात बाधित नहीं होता। इस डिजिटल समाधान से ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में मदद मिल रही है, जिससे यात्रियों को राहत मिल रही है।

नए सिस्टम से जनता को राहत

ट्रैफिक पुलिस और डीटीसी द्वारा शुरू की गई इस पहल से दिल्ली की सड़कों पर लगने वाले लंबे ट्रैफिक जाम में काफी सुधार हुआ है। अब लोग बिना किसी देरी के अपने गंतव्य तक पहुंच सकते हैं। डीटीसी और ट्रैफिक पुलिस की यह पहल दिल्ली की ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में एक अहम कदम है।

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